“अच्छा… मेरा कमरे में आने का तरीका तुम्हें बुरा लगा?” अभिराज ने उसकी तरफ देखते हुए धीमे स्वर में कहा, “और उस रात जो तुम मेरे कमरे में आई थीं… वो क्या था?”
“कौन सी रात? मैं तो आपसे पहली बार मिल रही हूँ,” अनाया ने तुरंत नज़रें फेरते हुए कहा।
“मुझे ना पहचानने का नाटक कर रही हो?” अभिराज हल्का सा मुस्कुराया, “देखो मिस अनाया… तुम मुझे पहचान चुकी थीं। जब बालकनी में मुझे देखा था ना, तब तुम्हारी आँखें जिस तरह चौड़ी हुई थीं… मैं तभी समझ गया था।”
वह धीरे-धीरे बेड के पास आ गया।
वो तुरंत खड़ी हो गई।
“आप… यहाँ क्यों आ रहे हैं?” उसकी आवाज़ हल्की सी हकलाने लगी थी।
“उस रात तुम मेरे कमरे में क्यों आई थीं?” अभिराज ने सीधे पूछा।
“मैंने कहा ना, मैं नहीं आई थी आपके कमरे में। मैं तो आपको जानती तक नहीं,” अनाया अपनी बात पर अड़ी हुई थी।
उसने मन ही मन तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह अपनी बात से नहीं हटेगी।
अभिराज इस वक्त कपड़े बदल चुका था।
लोअर और ढीली टी-शर्ट में भी उसका व्यक्तित्व उतना ही प्रभावशाली लग रहा था।
उसने आराम से अपनी पॉकेट से फोन निकाला… और स्क्रीन उसकी तरफ कर दी।
“ये देखो।”
अनाया की साँस जैसे अटक गई।
वीडियो में साफ दिख रहा था — वह उसी होटल कॉरिडोर से निकलकर अभिराज के कमरे में जा रही थी।
फिर सुबह जल्दी उसी कमरे से बाहर निकलती हुई भी दिखाई दे रही थी।
“देखो मैडम,” अभिराज ने फोन नीचे करते हुए कहा, “रात को तुम मेरे कमरे में आईं… और सुबह जल्दी निकल गईं।”
वह उसकी तरफ थोड़ा झुक गया।
“अब ये मत कहना कि तुम्हें कुछ याद नहीं।”
अनाया के चेहरे का रंग उड़ चुका था।
“तुम नशे में थीं…” अभिराज ने उसकी आँखों में देखते हुए धीमे लेकिन साफ लहजे में कहा, “मैं नहीं।”
अब अनाया के होश पूरी तरह उड़ चुके थे।
“देखो… मेरे साथ कोई बदतमीज़ी करने की कोशिश मत करना,” अनाया ने घबराई हुई आवाज़ में अभिराज से कहा।
वह जल्दी से बेड से थोड़ा दूर हट गई।
“अब आप कमरे से जाइए।”
“वैसे मेरे पास और भी फुटेज है,” अभिराज ने बेहद शांत लहजे में कहा।
“क्या मतलब?” अनाया का चेहरा उतर गया।
अभिराज धीरे-धीरे खड़ा हुआ और उसकी तरफ बढ़ने लगा।
“मतलब… उसमें सिर्फ तुम्हारा कमरे में आना-जाना ही नहीं दिखता,” उसने कहा, “और भी बहुत कुछ काफी क्लियर है।”
अनाया की साँसें तेज़ हो गई थीं।
“जब तुम आई थीं, मैं लैपटॉप पर काम कर रहा था,” अभिराज ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “और जब तुमने मेरे साथ वो सब करना शुरू किया… तब मैंने लैपटॉप का कैमरा ऑन कर दिया।”
“क्या…?” अनाया की आवाज़ कांप गई।
“मुझे लगा था किसी दुश्मन ने तुम्हें भेजा है मुझे फँसाने के लिए,” अभिराज बोला, “इसलिए मैंने सबूत रखने के लिए रिकॉर्डिंग ऑन कर दी।”
वह अब उसके काफी करीब आ चुका था।
“तो हाँ… बहुत कुछ रिकॉर्ड हुआ है।”
उसने हल्का सा सिर झुकाकर पूछा—
“देखना चाहोगी?”
“जब आपको लगा कि मुझे किसी ने भेजा है… तो आपने मुझे कमरे से बाहर क्यों नहीं निकाल दिया?” अनाया ने खुद को संभालते हुए पूछा।
उसकी बात पर अभिराज धीमे से मुस्कुराया।
“निकाल रहा था…” उसने बेहद धीमी आवाज़ में कहा, “मगर तुमने मुझे मौका ही नहीं दिया।”
अनाया का चेहरा शर्म और घबराहट से लाल पड़ गया था।
“तुमने मेरा फायदा उठाया,” अभिराज ने जानबूझकर गंभीर बनते हुए कहा, “इतना कि मैं ये तक भूल गया कि तुम्हें बाहर निकालना है।”
“देखो… अब चले जाओ,” अनाया ने लगभग हाथ जोड़ते हुए कहा, “प्लीज़।”
लेकिन अभिराज और करीब आ गया।
अब किया पीछे हटते-हटते दीवार से लग चुकी थी।
उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी साँसें सुनाई दे रही थीं।
“पता है…” अभिराज ने धीमे स्वर में कहा, “उस रात के बाद मैं तुम्हें ढूँढ़ रहा था।”
वह उसकी आँखों में देख रहा था।
“पूरे होटल में ढूँढ़ा… कहाँ-कहाँ नहीं ढूँढ़ा। मगर तुम मिली ही नहीं।”
दोनों अब इतने करीब खड़े थे कि उनकी साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं।
“मुझे क्या पता था…” अभिराज हल्का सा मुस्कुराया, “कि तुम तो सीधे मेरे ही घर में मिल जाओगी।”
“देखो, अगर आपने मेरे साथ कोई बदतमीज़ी करने की कोशिश की ना… तो मैं चिल्लाऊँगी,” अनाया ने खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करते हुए कहा।
“Seriously?” अभिराज ने भौंह उठाई, “और अगर मैंने सबको वो रिकॉर्डिंग दिखा दी तो?”
अनाया की आँखें फैल गईं।
“कैसे तुम मुझे kiss कर रही थीं…” उसने जानबूझकर धीमी आवाज़ में कहा, “कैसे तुम मेरे करीब आ रही थीं…”
वह उसके चेहरे के बेहद करीब झुक गया।
“तब क्या जवाब दोगी?”वैसे इन कपड़ों में भी तुम बहुत प्यारी लग रही हो,” अभिराज ने उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा था।
किया ने इस वक्त एक छोटी सी क्रॉप-टॉप शर्ट पहनी हुई थी।
उसका गोरा पेट साफ दिखाई दे रहा था और आगे से नेकलाइन भी काफी ओपन थी।
असल में अनाया को लगा था कि अब कमरे में कोई आने वाला नहीं है, इसलिए उसने आराम से कपड़े पहन लिए थे।
वैसे भी उनका परिवार काफी खुली सोच वाला था।
अनाया खुद कई साल विदेश में पढ़ाई करके वापस आई थी, इसलिए उसके लिए ऐसे कपड़े पहनना बिल्कुल सामान्य बात थी।
लेकिन जिस तरह अभिराज उसे देख रहा था… उससे अनाया असहज महसूस करने लगी थी।
उसकी नज़रें धीरे-धीरे उसके चेहरे से नीचे गईं और फिर उसके क क्लीवेज पर ठहर गईं।
वहाँ उसके क्लीवेज के थोड़ा नीचे एक छोटा सा तिल दिखाई दे रहा था।
अभिराज की आँखों में हल्की सी चमक आई।
“तुम्हारी इस गोरी त्वचा पर ये तिल…” उसने धीमी आवाज़ में कहा, “बहुत अट्रैक्टिव लगता है।” यह कहते हुए अभिराज ने उसकी ब्रेस्ट को टच किया था
अनाया ने तुरंत अपने हाथ से खुद को थोड़ा ढकने की कोशिश की और नज़रें फेर लीं।
“बस कीजिए,” उसने धीमे लेकिन सख्त स्वर में कहा, “आप हद पार कर रहे हैं।”
लेकिन अभिराज अब भी उसी शांत मुस्कान के साथ उसे देख रहा था… जैसे उसे अनाया की घबराहट साफ दिखाई दे रही हो।“प्लीज़… चले जाओ,” अनाया ने लगभग रोने वाली आवाज़ में कहा और उसके आगे हाथ जोड़ने की कोशिश की।
“चला जाऊँगा…”
अभिराज इतना ही बोला था कि तभी किसी ने किया के कमरे का दरवाज़ा नॉक किया।
अनाया का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया।
“अब तो चले जाइए… कोई आ गया है,” उसने घबराकर फुसफुसाते हुए कहा।
“तो क्या फर्क पड़ता है?” अभिराज ने बिल्कुल आराम से कहा, “मैं तुम्हारे कमरे में नहीं आ सकता क्या?”
“प्लीज़… हम लोग बाद में बात कर लेंगे, ठीक है?” अनाया ने जल्दी-जल्दी कहा।
अभिराज कुछ सेकंड उसे देखता रहा… फिर आगे बढ़ा और हल्के से उसके गाल पर किस कर दिया।
“फिलहाल आज इसी से काम चला लेता हूँ,” उसने धीमे स्वर में कहा, “मगर तुम मुझसे भाग नहीं सकती।”
वह उसके कान के पास झुक गया।
“उस पूरी रात की रिकॉर्डिंग वैसे भी मेरे पास है… समझीं?”
अनाया की आँखें भर आई थीं।
“वैसे अभी टाइम नहीं है,” अभिराज हल्का सा मुस्कुराया, “फिर बात करेंगे… क्योंकि बातें तो तुमसे बहुत सी करनी हैं।”
इतना कहकर वह वापस बालकनी की तरफ चला गया और आसानी से बाहर निकल गया।
अनाया ने तुरंत जाकर दरवाज़ा खोला।
बाहर उसकी मॉम खड़ी थीं।
“क्या हुआ? इतना टाइम लगा दिया दरवाज़ा खोलने में?” उन्होंने अंदर आते हुए कहा।
“वैसे तुम्हारा फोन कब से बज रहा है। तुम्हारी फ्रेंड कॉल कर रही थी। उसने मुझे फोन करके पूछा कि किया फोन क्यों नहीं उठा रही।”
“ओह…” अनाया ने जल्दी से फोन उठाया।
उसकी मॉम वापस बाहर चली गईं।
दरवाज़ा बंद होते ही अनाया ने राहत की साँस ली।
फिर सबसे पहले वह बालकनी की तरफ गई… और दरवाज़ा लॉक कर दिया।
“मैं फँस चुकी हूँ…” उसने धीरे से खुद से कहा।
और थकी हुई सी बेड पर आकर लेट गई।
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