वह लोग हाल में जाकर बैठ गए थे। दोनों बहनें भी हाल में चली गई थीं। दोनों परिवार साथ में डाइनिंग टेबल पर बैठे बातें कर रहे थे।
“आओ आओ बच्चों, हम लोग तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे,” अर्णव की मॉम सोनिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
वैसे सब लोग पहले ही मिल चुके थे, इसलिए अब ज़्यादा फॉर्मेलिटीज़ नहीं थीं। दोनों बहनें जाकर वहीं बैठ गई थीं।
तभी सामने लिफ्ट खुली और अभिराज बाहर आया।
इस वक्त उसने ब्लैक टी-शर्ट, जींस और ऊपर से जैेट पहनी हुई थी। बालों में हाथ फेरता हुआ, पूरे स्टाइल के साथ वह उनकी तरफ आ रहा था।
अनाया ने उसकी तरफ देखा… लेकिन अगले ही पल उसके होश उड़ गए।
क्योंकि तब तक अभिराज वहाँ तक पहुँच चुका था।
उसने सीधे अनाया की तरफ देखते हुए हल्का सा इशारा किया और फिर एक बड़ी सी स्माइल के साथ कहा—
“Hello.”
सबके सामने अनाया को अपनी जगह से खड़ा होना पड़ा।
अभिराज ने हैंडशेक के लिए हाथ आगे बढ़ाया, तो मजबूरी में उसे भी अपना हाथ आगे करना पड़ा।
“आपसे मिलकर खुशी हुई,” अभिराज ने बेहद सभ्य लहजे में कहा था… मगर उसकी आँखें कुछ और ही कह रही थीं।
उन आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
उसने अनाया के हाथ को हल्का सा दबाया था… जैसे उसे कुछ याद आ गया हो।
किया ने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया और उसे पूरी तरह इग्नोर करते हुए वापस अपनी जगह पर बैठ गई।
उसके बाजू वाली चेयर खाली थी… और अभिराज वहीं आकर बैठ गया।
“इशिता, तुमने कभी बताया ही नहीं तुम्हारी इतनी खूबसूरत बहन भी है,” अभिराज ने मुस्कुराते हुए कहा।
रिश्ता से ज्यादा हैरानी तो अर्णव को हुई थी।
क्योंकि उसका भाई ऐसे किसी लड़की में कभी इंटरेस्ट नहीं लेता था।“ मिली हैं, तो खुद जान जाइए,” इशिता ने मुस्कुराते हुए कहा था।
“बिल्कुल,” सोनिया ने बात आगे बढ़ाई, “देखो अब तुम अर्णव के बड़े भाई हो… और इशिता रिश्ता की छोटी बहन। किया, तुम दोनों को तो बहुत सी चीज़ें साथ में करनी हैं, समझे? बहुत सी responsibilities हैं तुम दोनों के ऊपर।”
इस बार अनायास की माम ने भी हामी में सिर हिलाया था।
“और हाँ,” सोनिया जी फिर बोलीं, “अनाया, अब ये तुम्हारी responsibility है। अभिराज को किसी चीज़ में कोई दिलचस्पी नहीं रहती। इसे जो ना आए, वो सिखाना भी है… और प्रोग्राम में इसे इधर-उधर गायब भी नहीं होने देना। वरना इसे तो बस काम, काम और काम ही पसंद है।”
“आप बिल्कुल फिक्र मत कीजिए,” अनाया कि मॉम मृणाल जी तुरंत बोलीं, “मेरी स्वीटी बहुत ज़िम्मेदार लड़की है। इसे हर काम करना पसंद है। ये अभिराज जी को भी अपने साथ ही रखेगी।”
“भाई अब … अपना काम थोड़ा छोड़ दीजिए,” इशिता ने मज़ाक में कहा था।
“ठीक है,” अभिराज ने सहजता से जवाब दिया।
फिर उसने हल्की मुस्कान के साथ अनाया की तरफ देखा।
“तो स्वीटी… अब तुम्हारी ज़िम्मेदारी रही मेरी ज़िम्मेदारी उठाना।”
टेबल पर बैठे सभी लोग हँस पड़े थे।
लेकिन अनाया के चेहरे पर मुस्कान होते हुए भी उसके अंदर अजीब सी बेचैनी चल रही थी।
अभिराज… तीस साल का।
अर्णव से कई साल बड़ा, समझदार और अपनी दुनिया में रहने वाला आदमी।
और किया… सिर्फ उन्नीस साल की।
रिश्ता से भी कई साल छोटी।
कोई सोच भी नहीं सकता था कि इन दोनों के बीच पहले ही कुछ ऐसा हो चुका था… जिसे दोनों भूलना चाहते थे, मगर भूल नहीं पा रहे थे।
आज सिर्फ करीबी लोग आए थे। बाकी गेस्ट्स कल आने वाले थे।
ज़्यादातर लोग बड़े बिज़नेस फैमिलीज़ से थे। ऐसे अमीर लोगों को अक्सर घूमने-फिरने और काम से दूर कुछ दिन बिताने का बस एक बहाना चाहिए होता था।
वैसे भी इन लोगों का लाइफस्टाइल आम लोगों से अलग था।
अपनी-अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने वाले लोग थे ये सब।
अर्णव और इशिता पिछले दो साल से साथ लिव-इन में रह रहे थे और दो साल साथ रहने के बाद उन्होंने शादी का फैसला किया था।
पूरी फैमिली इस फैसले से खुश हुई थी।
खाना खत्म होने के बाद धीरे-धीरे सब लोग उठने लगे।
कोई लॉन की तरफ चला गया, कोई पूल एरिया की तरफ… और कुछ लोग वहीं बैठकर बातें करने लगे थे।
खाना खाने के बाद शिवराज राठौर ने थकी हुई आवाज़ में कहा,
“हम तो बहुत थक गए हैं, अब सोना चाहते हैं।”
“बिल्कुल, हमें भी थोड़ा रेस्ट करना है,” आनंद मेहरा ने हामी भरते हुए कहा।
“हम लोग थोड़ा बाहर घूमने जा रहे हैं,” अर्णव ने उत्साह से कहा।
“चले?” रिश्ता ने तुरंत किया की तरफ देखकर पूछा।
“नहीं… मुझे भी कमरे में जाना है,” किया ने जल्दी से जवाब दिया।
उसने एक पल के लिए अभिराज की तरफ देखा था… और पाया कि वह पहले से ही उसे देख रहा था।
वो कहीं बाहर जाने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी।
असल में आनंद मेहता की दो बेटियाँ थीं — रिश्ता मेहता और अनाया मेहता।
वहीं शिवराज राठौर और सोनिया राठौर के दो बेटे और एक बेटी थी।
बड़ा बेटा अभिराज — तीस साल का, जिसे शादी-विवाह या रिश्तों में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी।
छोटा बेटा अर्णव — पच्चीस साल का।
रिश्ता की उम्र तेईस साल थी… जबकि किया अभी सिर्फ उन्नीस साल की हुई थी।
और अभिराज व अर्णव की बहन अभी उनके साथ नहीं आई थी। वह कल आने वाली थी।
“आप लोग बैठिए, मैं चलती हूँ,” अनाया जल्दी से खड़ी हुई और अपने मॉम-डैड के पीछे-पीछे चली गई।
वह नहीं चाहती थी कि अभिराज फिर उससे बात करे।
वैसे भी… उसने अपने मन में तय कर लिया था।
वह उसे नहीं जानती।
उस रात वह नशे में थी।
कमरे में पहुँचते ही उसने कपड़े बदल लिए।
जींस और टी-शर्ट उतारकर उसने एक ढीली क्रॉप टॉप शॉर्ट पहन ली और बेड पर आकर लेट गई।
“तुम्हें बस उसे इग्नोर करना है, किया… तुम्हें कुछ याद ही नहीं है…” उसने खुद से धीरे से कहा।
अपने ही विचारों पर वह हल्का सा मुस्कुराई थी।
तभी…
बालकनी के दरवाज़े की हल्की सी आवाज़ आई।
किया, जो उल्टा लेटी हुई थी, तुरंत उठकर बैठ गई।
और अगले ही पल उसके होश उड़ गए।
अभिराज कमरे के अंदर आ चुका था।
“आप… यहाँ क्या कर रहे हैं?” अनाया घबराकर जल्दी से खड़ी हो गई।
“मैं तुमसे बात करना चाहता था,” अभिराज ने बिल्कुल आराम से कहा।
वह सामने पड़े सोफे तक गया, चेयर खींची और आराम से बैठ गया।
“तुम ऊपर चली आई… तो मुझे लगा शायद बाद में बालकनी में आओगी। लेकिन जब तुम बाहर नहीं आई… तो मैं खुद ही आ गया।”
“ये कौन सा तरीका है किसी के कमरे में आने का?” वो गुस्से में बोली, “ऐसे बालकनी से कौन आता है?”
वह अब पूरी तरह खड़ी हो चुकी थी।
“और मुझे आपसे बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। आप यहाँ से जाइए।”
अभिराज ने उसकी बात ध्यान से सुनी… फिर हल्का सा मुस्कुराया।
“सच में?” उसने धीमे से पूछा, “या फिर तुम बस डर रही हो… कि अगर हम बात करेंगे, तो तुम्हें वो सब याद आ जाएगा जिसे तुम भूलने की कोशिश कर रही हो?”
Write a comment ...